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श्राद्धकर्म पर विशेष - अमरापुर दरबार

बड़ों का श्राद्ध करने से उनका आशीर्वाद मिलता है, घर परिवार में सुख, शान्ति, समृद्धि बनी रहती है ! मातृ पितृ दोष नहीं लगता !

श्राद्ध में कराया भोजन पितरों तक पहुंचना….

इस आधुनिक युग में अविश्वासी व नास्तिक लोग धर्म, कर्म, श्रद्धा, भक्ति-भाव में कम विश्वास करते हैं ! वे समझते हैं कि- ये पूजा-पाठ, कर्म-धर्म, यज्ञ-अनुष्ठान, तर्पण-श्राद्ध, पिण्डदान, देवी-देवताओं का अनुष्ठान सब व्यर्थ के प्रपंच है ! कोई भी शुभ-अशुभ नहीं ! जो वर्तमान में करें- वहीं सही है ! अभी का किया हुआ कर्म पूर्वजों को नहीं मिलता है ! पर ऐसा नही है !

इस पर विचार करके देखा जाय तो ये शुभ कर्म, धर्म अनुष्ठान लौकिक दृष्टि से सब सही है ! इन शुभ कार्यों का फल भी अवश्य ही मिलता है ! किसी को शीघ्र तो किसी को देर से ! पर है सत्य ! अगर ये कर्म या ईश्वरीय शक्ति न हो तो इतना बड़ा संसार किसी भी बात पर विश्वास ही नहीं करेगा ! इतनी पूजा, प्रार्थना, आरती, हवन-यज्ञ, तीर्थाटन व समय-समय पर ईश्वरीय अवतारों के दर्शन विभिन्न देवी-देवताओं के रुप में होते हैं ! ऐसी अनेक आश्चर्यजनक शक्तियां ! ये सभी कार्य मनोरथ पूरा करने में सक्षम हैं ! श्री गणेश चतुर्थी पर श्री गणेश भगवान की पूजा, जन्माष्टमी पर श्रीकृष्ण व्रत-अनुष्ठान, शिवरात्रि पर शिवाराधना, नवरात्रि पर देवीमाता की घट स्थापना, बसन्त पंचमी पर विद्या की अधिष्ठात्री देवी सरस्वती का और दीवाली में माँ लक्ष्मी पूजन, सद्गुरु टेऊँराम जयंती पर सद्गुरु महाराज जी का विशेष पूजन, अर्चन, चालीहा अनुष्ठान आदि की समय-समय पर पूजा-अर्चना होती है ! जिससे सभी की मनोकामनाए पूर्ण होती है ! इन सबके मूल में भी आस्था विश्वास ही हैं !

आस्था-विश्वास न हो तो इस संसार की हालत का अनुमान सहज ही लगाया जा सकता है ! कहने का तात्पर्य यह है कि ये सभी धार्मिक कर्म सभी सत्य है ! अविश्वासी वर्ग के लिए अनेक प्रमाण संसार में सर्वत्र मौजूद हैं !

गंगा मैया का जल- जो कभी खराब नही होता ! ज्वाला देवी मंदिर में अभी भी ज्वाला (अग्नि) का जलना ! अमरनाथ में स्वतः ही बर्फ का शिवलिंग बन जाना ! ऐसे अनेक प्रमाण है ! जो आस्था विश्वास को सिद्ध करते है !

इसी प्रकार श्राद्ध पक्ष में सभी लोग श्राद्ध-कर्म करते हैं और करने भी चाहिए ! प्रत्येक व्यक्ति अपने पूर्वजों की तिथियों के अनुसार ब्राह्मणों को भोजन करवाते है या फिर मंदिर एवं धार्मिक स्थानों पर भोजन प्रसादी देते है ! साथ ही गौ माता या कोएँ को भी खिलाया जाता है !

हर व्यक्ति अपनी श्रद्धानुसार “श्राद्ध कर्म” करता है ! ये सभी अपने पूर्वजों के निमित्त शुभकर्म करते है और यह सत्य है कि ब्राह्मण, गाय, कौवों को कराया गया भोजन पितरों तक पहुंचता है !

श्री प्रेम प्रकाश मण्डल के चतुर्थ पीठाधीश्वर परम पूज्य सद्गुरु स्वामी हरिदासराम जी महाराज श्राद्ध कर्म को प्रमाणित कर कहते थे – जैसे फैक्स मशीन या (आज के युग में मोबाइल) में टाइप किया हुआ वही का वही जो भी में लिखा होता है- वह ज्यों का त्यों भेजे गये स्थान पर वैसा ही लिखा हुआ पहुँच जाता है ! चाहे वह सात समुद्र पार ही क्यों न हो ! न कोई तार, न कोई यंत्र ! फिर भी जैसा का तैसा छप जाता है ! ऐसे ही मृत्युलोक में किया गया श्राद्धकर्म या कोई भी शुभ-कर्म परलोक में भी अपने पितरों को पहुंचता है ! ये सभी कार्य ईश्वरीय शक्ति द्वारा होता हैं ! अतः हमें श्रद्धा-विश्वास के साथ सभी शुभकार्य करने चाहिए !

शास्त्रों में लिखा है कि पितर लोग श्राद्ध से तृप्त होकर आयु-विद्या- यश, धन, स्वर्ग- मोक्ष इत्यादि सभी सुखों का हमें आशीर्वाद देते हैं ! श्राद्धचन्द्रिका में आता है कि श्राद्ध की तनिक भी वस्तु व्यर्थ नहीं जाती ! आगे चलकर फलीभूत होती है ! अत: श्राद्ध कर्म अवश्य ही करना चाहिए !

जो लोग बड़ो के निमित श्रद्धापूर्वक श्राद्धकर्म करते है ! उनके कुल-परिवार में कोई भी क्लेश-बाधा नही आती और उनकी आत्मा को शांति भी मिलती है !

जो कोई भी शुभकर्म हमारे शास्त्रों में बतलाये गये हैं ! वे सभी सत्य है ! वेद-विधि के अनुसार हम सबको पुण्यमयी शुभ कार्य निरन्तर करते रहना चाहिए ! जिससे लोक-परलोक दोनों संवरेगें और घर परिवार मे सदैव सुख समृद्धि व खुशयाली बनी रहेगी !

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