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प्रेम, सेवा और साधना की अद्भुत परम्परा: श्री अमरापुर स्थान व श्री प्रेम प्रकाश सम्प्रदाय (पंथ) - अमरापुर दरबार

भारतीय दर्शन मे संत परम्परा केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं रही है। संतों ने समाज को प्रेम, सेवा और सद्भाव का मार्ग दिखाया है। इसी महान परम्परा में श्री अमरापुर स्थान, श्री प्रेम प्रकाश मंडल का नाम अत्यंत श्रद्धा के साथ लिया जाता है। यह सम्प्रदाय आध्यात्मिक चेतना, मानव सेवा और सनातन संस्कृति का महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है।

इस दिव्य परम्परा की स्थापना श्री 1008 आचार्य सदगुरु स्वामी टेऊँराम जी महाराज ने की थी। उनका जन्म 6 जुलाई 1887 को सिंधु नदी के समीप स्थित खंडू गांव में हुआ था। बचपन से ही उनका मन ईश्वर भक्ति में लगता था। वे अत्यंत सरल, शांत और आध्यात्मिक स्वभाव के थे।

मात्र 14 वर्ष की आयु में उन्होंने अपने गुरुदेव स्वामी आसुराम से दीक्षा ग्रहण कर ली थी। इसके बाद उनका जीवन पूरी तरह अध्यात्म को समर्पित हो गया। उन्होंने युवावस्था में हरिद्वार में संन्यास ग्रहण किया। संन्यास के पश्चात उन्होंने सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार का महान कार्य प्रारम्भ किया।

स्वामी टेऊँराम जी ने सनातन परंपरा में समाज को ॐ श्री सतनाम साक्षी नाम मंत्र दिया। यह मंत्र आज भी लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का आधार है। उन्होंने मानव मात्र को प्रेम और सद्भाव के साथ जीवन जीने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि मनुष्य को ईश्वर को साक्षी मानकर आत्मचिंतन करना चाहिए।

वे केवल संत ही नहीं थे। वे भारतीय दर्शन के महान साहित्यकार और दार्शनिक एवं महान समाज सुधारक भी थे। उनके द्वारा रचित श्री प्रेम प्रकाश ग्रंथ आध्यात्मिक साहित्य की अमूल्य धरोहर माना जाता है। लगभग 800 पृष्ठों के इस ग्रंथ में दोहे, पद्म, छंद, कवित और भजनों का अद्भुत संग्रह है। इसमें आध्यात्मिक ज्ञान, भक्ति और जीवन दर्शन का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है।

उनकी रचनाओं में संत कबीर, मीरा, सूरदास, रसखान, गुरु नानक और दादूदयाल जैसी संत परम्परा की झलक दिखाई देती है। उन्होंने श्री अमर कथा, यमराज नचिकेता, साक्षी दर्शन, कवितावली – छंदावाली और प्रेम प्रकाश दोहावली, सोलह शिक्षाएं, सलोक, माला शान्ति के दोहे जैसे अनेक ग्रंथों की रचना भी की। केवल 55 वर्ष की आयु में उनका महानिर्वाण हुआ। उनका महानिर्वाण हैदराबाद स्थित अमरापुर दरबार में हुआ। अल्प आयु में ही उन्होंने समाज और अध्यात्म को अमूल्य धरोहर प्रदान की।

उनके पश्चात महर्षि स्वामी सर्वानंद जी महाराज ने इस सनातन परम्परा को आगे बढ़ाया। उन्होंने जयपुर में श्री अमरापुर स्थान की स्थापना की। इसके बाद स्वामी शांति प्रकाश जी महाराज तथा स्वामी हरिदास राम ने इस आध्यात्मिक धारा को निरंतर आगे बढ़ाया। वर्तमान में स्वामी भगत प्रकाश जी महाराज के नेतृत्व में सम्पूर्ण प्रेम प्रकाश मंडल संचालित हो रहा है।

आज जयपुर स्थित श्री अमरापुर स्थान सम्पूर्ण प्रेम प्रकाश मंडल का मुख्यालय है। यहां से देश-विदेश की शाखाओं का संचालन किया जाता है। श्री अमरापुर स्थान केवल मंदिर ही नहीं है। यह स्थान समाज सेवा, साधना और सामाजिक समर्पण का मुख्य केंद्र है। यहां अन्न प्रसाद वितरण, जल मंदिर, गौशाला, विश्राम गृह, मोक्षवाहिनी, निर्धन परिवारों को राशन वितरण और अस्पताल जैसी अनेक सेवाएं संचालित हो रही हैं।

सम्प्रदाय की सबसे बड़ी विशेषता सेवा भावना है। यहां भजन और सत्संग के साथ समाज सेवा को भी महत्व दिया जाता है। गरीबों को भोजन कराया जाता है। जरूरतमंदों को वस्त्र वितरित किए जाते हैं। रक्तदान शिविर, अमरापुर बाल संस्कार शिविर और स्वास्थ्य शिविर लगाए जाते हैं ! गौसेवा के कार्य भी निरंतर जारी हैं।

आज श्री प्रेम प्रकाश मंडल की भारत और विदेशों में लगभग 150 से अधिक शाखाएं हैं। राजस्थान, दिल्ली, गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तराखंड , मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और तमिलनाडु सहित अमेरिका, स्पेन, दुबई और बैंकॉक तक इसकी शाखाएं स्थापित हैं। हर आश्रम में प्रतिदिन भजन, सत्संग, सेवा और सुमिरन का वातावरण बना रहता है। हरिद्वार में अमरापुर घाट, स्वामी सर्वानंद घाट, प्रेम प्रकाश घाट, सतनाम साक्षी घाट और ध्यान कुंज, स्वामी टेऊँराम सेतु, जैसे अनेक आध्यात्मिक स्थलों का संचालन भी इसी परम्परा प्रेम प्रकाश मण्डल, श्री अमरापुर स्थान जयपुर द्वारा किया जा रहा है। रामेश्वर धाम में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशाल घाटों का निर्माण कराया गया है। यह सम्प्रदाय (पंथ) की सेवा भावना का जीवंत उदाहरण है। आज जब समाज भौतिकता और तनाव की ओर बढ़ रहा है, तब श्री प्रेम प्रकाश मंडल प्रेम, सेवा और आध्यात्मिकता का संदेश दे रहा है। यह परम्परा मानवता को जोड़ने का कार्य कर रही है। यह हमें सिखाती है कि सच्चा धर्म केवल पूजा नहीं है। सच्चा धर्म मानव सेवा, सद्भाव और आत्मकल्याण है। निस्संदेह, स्वामी टेऊँराम जी महाराज द्वारा प्रज्वलित आध्यात्मिक दीप आज भी लाखों लोगों के जीवन में प्रेम, प्रकाश और शांति का आलोक फैला रहा है।

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