युगपुरुष आचार्य श्री 1008 सद्गुरु स्वामी टेऊँराम जी महाराज
आचार्य श्री सद्गुरु स्वामी टेऊँराम जी महाराज का जन्म सिन्ध प्रदेश, हैदराबाद जिले के खण्डू गाँव विक्रम सम्वत् 1944, सिन्धी चार तारीख, आषाढ़ शुक्ल पक्ष, षष्ठी तिथि, शनिवार का दिन, प्रातः 5 बजे फूलवंशी, क्षत्रिय कुल में हुआ था ! जैसे प्रभु श्री राम का जन्म सरियु नदी, भगवान श्री कृष्ण यमुना नदी के तट पर हुआ वैसे ही स्वामी जी का जन्म भी “सिन्धु नदी” के पावन तट पर हुआ था !
स्वामी जी की “माता श्री” का नाम कृष्णा देवी और “पिता श्री” का नाम श्री चेलाराम जी था! माता कृष्णा देवी स्वामी जी को गोद में लेकर प्रतिदिन मीठे स्वर से “शिवोऽहम्” व “राम नाम” की लोरी सुनाती थी ! पण्डित जयराम जी ने स्वामी जी के ग्रह नक्षत्र देखकर भविष्यवाणी की कि यह बालक होनहार होगा तथा अवतार के रूप में कहलायेगा और फिर स्वामी का नाम “टेऊँराम” रखा !
पिता चेलाराम जी ने ४-६ वर्ष की आयु में स्वामी जी को पाठशाला पढ़ने के लिए भेजा ! किन्तु पढ़ाई में मन नही लगा! तब स्वामी जी ने केवल एक “ॐ” अक्षर ही कंठरस्त किया ! स्वामी जी १३-१४ वर्ष के हुए ! तब दादा साईं आसूराम जी महाराज से नाम-दीक्षा प्राप्त कर भगवत भजन में लग गए !
अवतारी महापुरुष सतगुरु स्वामी टेऊँराम जी महाराज ने अपना पंथ, ग्रन्थ, मंत्र एवं थाम अपने प्रचण्ड तप भक्ति ज्ञान के बल से बनाया! पंथ : श्री प्रेम प्रकाश पंथ मंत्र : सतनाम साक्षी ग्रन्थ : श्री प्रेम प्रकाश ग्रन्थ धाम : श्री अमरापुर धाम
सतगुरु स्वामी टेऊँराम जी महाराज ने सर्वप्रथम सिंध प्रदेश में रेत के रीले पर टण्डे आदम “अमरापुर दरबार” का निर्माण किया ! जिससे स्वामी जी को डिब वाले सांई के नाम से भी जाना जाता था !
सतगुरु स्वामी टेऊँराम जी महाराज को सर्वप्रथम “भगवान श्री लक्ष्मीनारायण” के दर्शन हुए ! इसीलिए सभी प्रेम प्रकाश आश्रमों में इष्टदेव “भगवान श्री लक्ष्मीनारायण” की प्रतिमा विराजमान की गई है! सतगुरु स्वामी टेऊँराम जी महाराज के द्वितीय पीठाधिश्वर स्वामी सर्वानन्द जी महाराज ने देश-विभाजन के पश्चात जयपुर में “श्री अमरापुर दरबार” का निर्माण करवाया ! जो आज श्री प्रेम प्रकाश आश्रम (मण्डल) का मुख्यालय है !
श्री अमरापुर स्थान जयपुर में टण्डेआदम व खंडू गांव की रज ( मिट्टी) दर्शनार्थ रखी गयी हैं ! मंदिर के गर्भगृह में सतगुरु स्वामी टेऊँराम जी महाराज, स्वामी सर्वानंद जी का समाधि स्थल बना हुआ है ! जहाँ हजारों प्रेमी नित्य-नियम से दर्शन, सुमरन का लाभ लेते हैं ! सतगुरु स्वामी टेऊँराम जी महाराज का साप्ताहिक जन्मदिन-शनिवार, मासिक जन्म चौथ एवं आषाढ़ मास में सदगुरु टेऊँराम जन्म जयंती पूरे विश्व भर में बड़े श्रद्धा भक्ति भाव से मनाया जाती है ! स्वामी जी का मुख्य प्रसाद ढोढ़ा-चटनी हैं ! जो कि सभी प्रेम प्रकाश आश्रमों में वितरण किया जाता हैं !
सतगुरु महाराज जी की वाणी को “श्री प्रेम प्रकाश ग्रन्थ” में संजोया गया है ! जो सभी वेद शास्त्रों का सार तत्व है ! सतगुरु महाराज जी द्वारा रचित अनुभव की वाणी सोलह शिक्षाएँ भी है ! जिसमें पूरे वेद शास्त्रों का ज्ञान समाया हुआ है ! इसी प्रकार सतगुरु स्वामी टेऊँराम जी महाराज द्वारा ब्रह्मदर्शनी की रचना भी की गई ! जिसमें पूरा ब्रह्मज्ञान समाया हुआ है ! जिसका नित्य नियम से पाठ करना चाहिए ! सतगुरु महाराज जी के शांति के दोहे जिसका पाठ करने से शांति मिलती है !
वर्तमान में सतगुरु स्वामी टेऊँराम जी महाराज के देश-विदेश में लगभग 150 प्रेम प्रकाश आश्रम बने हुए हैं ! जहां नित्य नियम भजन सत्संग, आरती , प्रार्थना होती है ! श्री अमरापुर स्थान जयपुर में “गौशाला” बनी हुई हैं ! जहाँ नित्यप्रति गौ माता की सोवा होती है ! इसी प्रकार जयपुर के मानसरोवर में विशाल “सदगुरु टेऊँराम गौशाला” बनी हुई है ! जिसमे लगभग २५० गौमाता की सेवा होती है !
स्वामी जी के नाम से रामेश्वर धाम एवं उज्जैन में स्वामी टेऊँराम घाट भी बने हुए ! सत्गुरु स्वामी टेऊँराम जी महाराज के नाम से अनेक स्थानों पर सद्गुरु टेऊँराम चौक, मार्ग, सर्किल, पथ, गौशाला, विद्यालय, बाग बगीचें एवं सेवा समितियां आदि बनी हुई है !
महायोगी युगपुरुष आचार्य सतगुरु स्वामी टेऊँराम जी महाराज 55 वर्ष की आयु तक धराधाम पर रहें ! फिर अपनी लीला समेट कर सिंधी चार तारीख, शनिवार, पुरुषोत्तम मास, सम्वत् 1999 को पंच भौतिक शरीर का त्याग कर पारब्रह्म की ज्योति में समा हो गये ! महापुरुषों के श्री चरणों में कोटि कोटि वंदन…… सतनाम साक्षी!!!
!! सद्गुरु स्वामी टेऊँराम जी महाराज द्वारा रचित ग्रन्थावली !!
श्री प्रेम प्रकाश ग्रन्थ (795 पृष्ठीय आध्यात्मिक महाग्रंथ), श्री प्रेम प्रकाश दोहावली (1375 दोहे), श्री ब्रह्मदर्शनी (250 ब्रह्म पद), श्री कवितावली-छन्दावली (पद-छन्द), श्री अमरापुर वाणी (हिन्दी-सिन्धी भजन संग्रह), सलोक माला (108 सलोक), सोलह शिक्षाएँ, शान्ति के दोहे, अमर कथा आदि अनुभवी वाणी का अमूल्य खजाना ‘महाराज श्री’ द्वारा रचित है ! जो कि श्री अमरापुर स्थान जयपुर सहित सभी प्रेम प्रकाश आश्रमों में उपलब्ध हैं ! ऐसे युगपुरुष – युगदृष्टा कर्मयोगी को हमारा शत्- शत् नमन् !
