Skip to content

सदगुरु टेऊँराम चालीहा अनुष्ठान पर विशेष: दर्शन से किया - चालीहा व्रत पूर्ण - अमरापुर दरबार

हरि भक्त के संग से, हरि भक्ती मिल जाय ! कह टेॐ हरि भक्ति से, हरि का दर्शन पाय !!

संतों-महापुरुषों का इस धरा धाम पर अवतरण भी अनुपम-विलक्षण-दिव्यतम होता है, उनके आने का उद्देश्य– मानव के मन को उस अविनाशी प्रभु परमात्मा की ओर मोड़ना है ! जिसके लिए जीव का इस अमोलक मानव देह में आना हुआ ! महापुरुषों के मंगल प्राकट्य के इतिहास इस बात के प्रमाण हैं !

सिंध-हिंद के महान संत शिरोमणि महायोगी, युगपुरुष आचार्य श्री 1008 सद्‌गुरु स्वामी टेऊँराम जी महाराज का इस धरा धाम पर आना और सबके कष्ट-क्लेश मिटाकर हम सबको उस सत्मार्ग की ओर लगाने का समूचा श्रेय माता कृष्णादेवी के चालीस दिवसीय व्रत उपासना को ही जाता है! सर्वप्रथम माता कृष्णादेवी ने ही 40 दिन फलाहार खाकर एवं भगवत् भजन नाम सुमरण कर चालीहा व्रत पूर्ण किया था। चालीसवें दिन स्वप्न में भगवान शिव जी ने आकर दर्शन दिया और कहा- हम शीघ्र ही आपके घर अवतार लेकर आ रहे हैं ! ऐसा आश्वासन (वरदान) पाकर माता कृष्णादेवी ने श्रद्धा भक्ति-भाव से 41 वें दिन उपवास पूरा किया ! समय पाकर माता को तपस्या का फल मिला और हम सबके कल्याण कारक ईश्वरांश मंगलमूर्ति सद्‌गुरु स्वामी टेऊँराम जी महाराज ने इस धरा-धाम सिंध टंडा आदम के खंडू गांव में अवतरण लिया !

हम सबके हृदय में भी गुरुदेव व प्रभु परमात्मा के प्रति भक्ति-भाव प्रगाढ़ हो. इसी श्रद्धा-प्रेम से आज समस्त संसार इस चालीस दिवसीय चालीहा व्रत उपासना पर्व को श्रद्धा भक्ति भाव से मनाते है और इसके लिए विविध धार्मिक आध्यात्मिक अनुष्ठान पूर्वक सत्कार्य भक्तों द्वारा किये जाते है !

चालीहा का महात्मय बहुत पुराना है ! भगवान श्री झूलेलाल चालीहा महोत्सव भी सर्व मनोरथ सिद्ध करने हेतु भक्तों द्वारा मनाया जाता है ! साथ ही अनेक देवी-देवताओं के चालीसा पाठ भी प्रसिद्ध हैं- शिव चालीसा, हनुमान चालीसा, झूलेलाल चालीसा, दुर्गा चालीसा और स्वामी टेऊँराम चालीसा आदि. ‘चालीहा महोत्सव’ के अन्तर्गत इसका नित्य नियम से पाठ करने से मनइच्छित फल की प्राप्ति होती है!

सर्व समर्थ सद्गुरु स्वामी टेऊँराम जी महाराज के स्वर्णिम काल का वह ममस्पर्शी प्रसंग, सदगुरु टेऊँराम चालीहा व्रत उपासना तत्कालीन समय में भी भक्तों द्वारा की जाती थी, इससे ‘भक्त और भगवान की प्रगाढ़ता’ के बारे में पता चलता है !

卐 माता पदीबाई को दर्शन देना 卐

यह बात उस समय की है जब ‘सद्‌गुरु स्वामी टेऊँराम जी महाराज’ को प्रेमी भक्तों द्वारा पता लगा कि श्री गुरुदेव भगवान के दर्शनों की प्यास लिए गौसपुर के भाई मनाराम की धर्मपत्नी ‘माता पदीबाई ने भी चालीहा व्रत अनुष्ठान रखा है’ और वह प्रभु परमात्मा- गुरुदेव के दिये अखण्ड नाम का सुमरण कर रही है, उसका संकल्प है कि सदगुरु टेऊँराम जी महाराज मुझे घर आकर दर्शन दे, जब तक ‘सद्‌गुरु स्वामी टेऊँराम जी महाराज’ के दर्शन नहीं होंगे, तब तक मैं कमरे से बाहर नहीं निकलूँगी और मेरा व्रत भी चलता रहेगा ! ऐसा कठोर तप सर्व प्रथम माता पदीबाई ने किया था !

ऐसा दृढ़ निश्चय करके ही माता पदी बाई ने चालीहे व्रत की समय-सीमा को पूरा किया ! माता पदी बाई का व्रत पूरा हो जाने पर कमरे से निकलने के लिए घर वालों एवं आस पास और रिश्तेदारों पंचों के अनुनय विनय की ! वह भी अस्वीकार कर दिया ! माता पदी बाई भक्ति-भाव मिश्रित मृदुल वाणी में पूर्ण आस्था से बोली – मेरे हृदय में गुरुदेव के प्रति प्रेम भाव सच्चा है और मेरी गुरुनिष्ठा अटूट है तो मेरे घर यानि दासी के घर ‘सद्‌गुरु महाराज’ जरूर आएँगे ! जब तक स्वामी जी घर दर्शन देंगे नहीं आयेंगे, तब तक मैं बाहर नहीं आऊंगी ! मैं चिरकाल तक प्रतीक्षा करूंगी ! जिस प्रकार माता शबरी ने भगवान श्री राम जी के दर्शनों की प्रतिक्षा (प्यास) थी, वैसे ही आज इस माता को भी दर्शनों की प्यास थी ! दर्शन के बाद ही चालीहा व्रत पूर्ण करूँगी ! यह मेरा दृढ़ संकल्प है ! गुरु महाराज जी माता के स्थान से बहुत दूर थे ! थक हारकर कंधकोट व गौसपुर के पंचों ने टण्डो आदम पहुँचकर पूज्य सद्गुरु महाराज जी को सारी बात बताई ! करुणानिधान, भक्तों की हर शुभ इच्छाओं को पूरी करने वाले अर्न्तयामी, सर्व ऋिद्धि-सिद्धि के मालिक, भक्तवत्सल आचार्य श्री सद्गुरु स्वामी टेऊँरामजी महाराज ने जब यह बात सुनी, तत्क्षण उठ खड़े हुए और बोले, चलो अभी चलते हैं माता पदी बाई के पास ! इतना कष्ट उठाकर प्रभु परमात्मा की भक्ति कर रही है. तो हम भी उस माता के दर्शन करेंगे !

देखो ! श्री गुरुदेव भगवान की कैसी भक्त वत्सलता निर्मानता ! कहाँ माता का संकल्प था कि मैं सद्गुरु महाराज जी के दर्शन करके ही व्रत खोलूँगी और कहाँ पूर्ण महायोगी परम दयालु ‘सद्‌गुरु स्वामी टेऊँराम जी महाराज’ कह रहे हैं कि हम भी उस माता के दर्शन करेंगे ! इसे कहते हैं भक्त और भगवान का अनन्य प्रेमा भक्ति ! भक्त की भगवान के प्रति अटूट श्रद्धा !

श्री गुरुदेव भगवान का मंगल आगमन गौसपुर में होते ही सर्वप्रथम माता पदी बाई के घर पहुंच कर दर्शन दिया ! सद्गुरु महाराज जी का दिव्य दर्शन पाकर माता पदी कमरे से बाहर निकल कर सद्गुरु महाराज जी के श्रीचरणों में अत्यन्त प्रसन्न मन से कोटि कोटि वन्दन करती है ! उसके नेत्रों से प्रेम विह्नल अश्रुधारा बहने लगती है, जैसे भगवान श्रीराम का दर्शन पाकर माता शबरी के प्रेमाश्रु निकले थे- वैसे ही माता की आँखों से सजल धारा बह रही थी. तब श्री गुरुदेव भगवान ने अपना कृपा भरा वरद् हस्त उनके ऊपर रखा और माता बहुत गद्गद् प्रसन्नचित्त हुई ! इस प्रकार माता ने चालीहा अनुष्ठान पूरा किया !

तत्पश्चात् यहीं पर श्री गुरुदेव भगवान के पावन सानिध्य में हवन-यज्ञ अनुष्ठान, पूजा-पाठ एवं भजन-सत्संग, भंडारे आदि का भव्य आयोजन हुआ ! वहाँ के सभी प्रेमी ऐसा अद्भुत दृश्य देखकर बड़े प्रसन्न हुए ! इसे कहते हैं भक्त और गुरु की अनन्त पराकाष्ठा ! भक्त व भगवान का प्रेम ! बोलो भक्त और भगवान की जय !!!!

सद्‌गुरु टेऊँराम का, चालीहा महोत्सव अभिराम ! श्रद्धा भक्ति से पाठ कर, होवे पूर्ण काम !!

Post navigation

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *