Skip to content

9 अगस्त 2025 "रक्षा बंधन पर्व" पर विशेष लेख - अमरापुर दरबार

!! भाई बहन का पावन पर्व रक्षा बंधन !!

माता लक्ष्मी जी ने सर्वप्रथम बलि को राखी बाँधी थी। ये बात तब की है जब दानवेन्द्र राजा बलि अश्वमेघ यज्ञ करा रहे थे। अश्वमेघ यज्ञ यानी सभी देवताओं पर विजय प्राप्त ! यह देखकर भगवान श्री नारायण ने राजा बलि को छलने के लिये वामन अवतार लिया और तीन पग में सब कुछ ले लिया और उसे पाताल लोक का राजा बना दिया ! इस पर बलि ने प्रभु से कहा – कोई बात नहीं मैं पाताल में रहने के लिये तैयार हूँ पर मेरी भी एक शर्त माननी होगी ! भगवान अपने भक्तो की बात कभी टाल नहीं सकते। तब बलि ने कहा ऐसे नहीं प्रभु! आप छलिया हो। पहले मुझे वचन दो…. जो माँगूगा वो आप देंगे….बलि को वचन दिया !

श्रीहरि नारायण ने वचन देकर कहा- हाँ अवश्य देंगे।

जब श्रीहरि को वचनबद्ध करा लिया तब बलि बोले- मैं जब सोने जाऊँ और जब उठूं तो जिधर भी नजर जाये उधर आपके ही दर्शन हो ! हमेशा मेरे साथ ही पहरेदार बनकर रहना होगा ।

भगवान नारायण उसकी माँग पर मन-ही-मन मुस्करा उठे और बोले इसने तो मुझे ही पहरेदार बना दिया है… ये सब कुछ हार कर भी जीत गया है पर अभी कर भी क्या सकते थे ? वचन जो दे चुके थे। भगवान को वहां रहना पड़ा, पाताल में रहते-रहते काफी समय बीत गया !

उधर वैकुण्ठ में माता लक्ष्मी जी को भगवान श्रीनारायण के बिना चिंता होने लगी। प्रभु कहा चले गए?? तब वहाँ नारद जी का आना हुआ। लक्ष्मी जी ने कहा- नारद जी, आप तो तीनों लोकों में भ्रमण करते हो क्या प्रभु श्रीनारायण को कहीं देखा आपने? यह सुनकर महर्षि नारद जी बोले कि पाताल लोक में हैं, प्रभु ! वे राजा बलि के पहरेदार बने हुये हैं। इस पर माँ लक्ष्मी जी ने नारद जी से कहा- अब आप ही मुझे राह दिखायें कि श्रीहरि यहाँ पर कैसे आवे…? तब नारद ने कहा आप राजा बलि को अपना भाई बना लो, और रक्षा का वचन लो पहले वचन ले लेना-दक्षिणा में जो माँगेंगी, वह देना होगा ! दक्षिणा में आप अपने नारायण भगवान को माँग लेना।

युक्ति पाकर माता लक्ष्मी जी सुन्दर स्त्री के भेष में रोते हुए राजा बलि के यहाँ पाताल लोक पहुँची ! बलि ने कहा- बहन, आप क्यों रो रहीं हैं? लक्ष्मी जी बोलीं- कि मेरा कोई भाई नहीं है, इसलिए मैं दुःखी हूँ !यह सुनकर बलि बोले- तुम मेरी धर्म की बहिन बन जाओ…. तब राजा बलि को अपना भाई बनाकर माँ लक्ष्मी जी ने सर्वप्रथम राखी (रखा सूत्र) पहनाई। इस पर माता लक्ष्मी ने बलि से पहले वचन लिया और बोली भेंट में मुझे आपका वे पहरेदार चाहिये! जब ये माँगा तो बलि ने सोचा धन्य हो बहन ! पति आये सब कुछ ले गये और ये महारानी आयीं तो उन्हें भी लें गयीं ! कहा जाता है तब से ही ये ‘रक्षाबन्धन’ पर्व की परम्परा शुरू हुई और इसीलिये जब कलावा बांधते समय यह मंत्र बोला जाता हैं-

येन बद्धो बलि राजा दानवेन्द्रो महाबलः ! तेन त्वाम प्रतिबद्धनामि, रक्षे मा चल माचलः !!

जिस रक्षासूत्र से महान् शक्तिशाली दानवेन्द्र राजा बलि को बाँधा गया था, उसी रक्षा बंधन से मैं तुम्हें बाँधता हूँ। जो सदैव तुम्हारी रक्षा करेगा।

भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को कायम रहने हेतु ये रक्षा बन्धन (राखी) का पावन पर्व मनाया जाता है। जिससे भाई अपनी बहन की सदैव रक्षा कर सके !

Post navigation

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *