महर्षि सतगुरु स्वामी सर्वानन्द जी महाराज का व्यक्तित्व कैसा निराला था ! जो कोई भी उनकी शरण में आता था तो उसे ‘श्री गुरु महाराज जी’ के चरणों में लगाते थे ! वे अपनी पूजा, प्रतिष्ठा और यश-कीर्ति कभी नहीं चाहते थे ! हमेशा गुरुदेव की यश-कीर्ति करते थे !
एक बार श्री अमरापुर स्थान-जयपुर में सद्गुरु स्वामी सर्वानन्द जी महाराज अपनी कुटिया में बैठे हुए थे ! ब्यावर से श्री मुरजमल अपने जवान पुत्र को लेकर स्वामी जी के पास आया ! अपना सारा दुःख सुना कर कहा कि- हे दयालु स्वामी जी ! मेरे इस लड़के घनश्याम की जबान (आवाज) बन्द हो गई है ! बोलना बन्द हो गया है ! कुछ भी बोल नही पा रहा है ! इसके ऊपर दया, कृपा करो ! अनेक दवाईयाँ व उपाय किए हैं, पर कुछ भी लाभ नहीं हुआ है ! अब सब तरफ से निराश होकर आपकी शरण में आया हूँ ! आप ही इस बालक पर कृपा करके इसे बोलने की शक्ति प्रदान करे !
श्री मुरजमल की बात सुनकर स्वामी जी ने उसे हिम्मत और भरोसा दिलाते हुए कहा कि – आप चिंता मत करो ! गुरु व ईश्वर में विश्वास रखो ! श्री गुरु महाराज सब अच्छा करेंगे !
अब ऐसा करो – घनश्याम को लेकर श्री गुरु महाराज के श्री मन्दिर एवं समाधि-स्थल में जाओ ! वहाँ जाकर माथा टेककर दर्शन करके घनश्याम से “सतनाम साक्षी, सतनाम साक्षी…” कहलवाओं ! जब तक वह न बोले ! तब तक आप बोलते जाना.. ! विश्वास रखकर मुरजमल लड़के को लेकर श्री अमरापुर स्थान जयपुर सद्गुरु स्वामी टेऊँराम जी महाराज के “श्री मन्दिर” व “समाधि स्थल” पर ले आया और स्वामी जी की आज्ञा अनुसार “सतनाम साक्षी…” ४…५…चार- पांच बार बोलकर घनश्याम से भी कहलवाने लगा ! यहाँ अब “श्री गुरुदेव जी” की ऐसी लीला हुई कि दस-बीस बार बोलने पर घनश्याम की जबान धीरे-धीरे खुलने लगी और वह अब खुश होकर “सतनाम साक्षी…३-४” बार बोलने लगा … बस – फिर क्या था ! वह गूंगा घनश्याम अच्छी तरह से बोलने लग गया ! यह अद्भुत चमत्कार देखकर सभी बड़े प्रसन्नचित्त हुए । श्री गुरुदेव भगवान की जय-जयकार करने लगे ! यह था “गुरु की कृपा” व “सतनाम साक्षी महामंत्र” का अद्भुत प्रभाव एवं चमत्कार !
लाखों की बिगड़ी बनाई इस द्वार ने, मुझको भी इस दर का एक आधार है…
जिसका अपने गुरु में पूर्ण विश्वास व पक्का भरोसा होता है ! उसके सर्व मनोरथ सिद्ध हो जाते है !
ऐसे थे- भक्तो के रक्षक , पालनहार सद्गुरु स्वामी सर्वानन्द जी महाराज ! शत्-शत् नमन ! कोटि-कोटि वन्दन…!
