गुरु व शिष्य का स्नेहात्मक अटूट अनोखा सम्बन्ध गुरु व शिष्य का अनोखा व अटूट सम्बन्ध होता है। अगर
!! पतिव्रता स्त्री की शक्ति !! तीर्थार्थिनी तु या नारी पतिपादोदकं पिबेत् । तस्मिन् सर्वाणि तीर्थानि क्षेत्रानि च न
!! गुरु के प्रति निष्ठा एवं पक्का विश्वास !! एक गुरू की शरण ली, एक गुरू का आधार !
महर्षि सतगुरु स्वामी सर्वानन्द जी महाराज का व्यक्तित्व कैसा निराला था ! जो कोई भी उनकी शरण में आता
सदगुरु टेऊँराम तेरी – मैने देखी महान शक्ति भेजने वाले स्वामी टेऊँराम – लेने वाले स्वामी टेऊँराम… संत-महापुरुषों की
आचार्य सदगुरु स्वामी टेऊँराम जी महाराज के परम शिष्य, प्रेम प्रकाश मण्डल के तृतीय पीठाधीश्वर सतगुरु स्वामी शान्तिप्रकाश जी
सतगुरु स्वामी शान्तिप्रकाश जी महाराज का जन्म श्रावण मास की पूर्णमासी, रक्षाबंधन, मंगलवार , सन्- 1907 में सिन्ध के
!! भाई बहन का पावन पर्व रक्षा बंधन !! माता लक्ष्मी जी ने सर्वप्रथम बलि को राखी बाँधी थी।
स्वामी जी का जीवन गहरे समुद्र के समान था । अनमोल रत्नों के भांति उनके गुण और उनकी गूढ़
समय के पाबंद, ज्ञाननिष्ट सादगी, त्याग, मर्यादा की साक्षात् मूर्ति – सद्गुरु स्वामी हरिदासराम जी महाराज महायोगी आचार्य सदगुरु
